Monday, December 1, 2008

ढाबा संस्कृति

जे.एन.यू मे १० के करीब ढाबे हैं! जिसमे से गंगा ढाबा
कैम्पस मे ही नही बल्कि इसके बाहर भी काफ़ी प्रसिद्ध है!
गंगा ढाबा, जे.एन.यू के अनोखे बौद्धिक संस्कृति की एक
अनोखी धरोहर है! छात्रगण इन ढाबो पर अकसर चाय की
चुस्कियो के साथ, विभिन्न राष्ट्रीय एंव अंतर्राष्ट्रीय पहलुओं
पर मन्त्रणा करते देखे जा सकते हैं! परिसर विस्तार के
साथ-साथ ढाबाओं की संख्या भी बढती जा रही है!
परिसर के ये ढाबे भूख मिटाने के साथ-साथ अपनी बौद्धिक
समझ को विकसित और सुदृढ करने के अनोखे केन्द्र हैं! ढाबा
संस्कृति जे.एन.यू को दूसरे शिक्षण संस्थानो से अलग करती है!
मुझे भी ढाबे पर बैठकर चाय पीना और दोस्तो के साथ विभिन्न
पहलुओं पर बातें करना अच्छा लगता है!

बस संख्या ६१५

बस संख्या ६१५ मिन्टो रोड टर्मिनल से चलकर पूर्वांचल
छात्रावास तक जाने वाली, ब्लूलाईन सेवा की एक
महत्वपूर्ण बस है! यह अपने यात्रा के दौरान दिल्ली के
अनेक महत्वपूर्ण स्थान , इन्डिया गेट, राष्ट्रीय संग्रहालय,
सफ़दरजंग का किला, सरोजनी नगर, भीकाजी कामा
पैलेस इत्यादि से होकर गुजरती है! जे.एन.यू कैम्पस के
लिए, ये कैम्पस की दुनिया को बाहरी दिल्ली से
जोङने वाली जीवनरेखा है! कैम्पस के छात्रगण
बसपास के द्वारा इसमे मुफ़्त मे यात्रा करते है!
अक्सर यह लोगो से खचाखच भरी होती है!
इस बस के इन्तेजार मे बैठे लोगो के चेहरे
पर उस समय एक अजीब सूकून की रेखा देखी
जा सकती है, जब उनका इन्तेजार समाप्त हो
जाता है और वो अंतत: बस मे चढ जाते है!

संस्कृत

संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओ मे से एक है!
संस्कृत दुनिया की प्राचीनतम संस्कृति मे से एक, भारतीय
संस्कृति की आधारशिला रही है! हमारे पौराणिक ग्रन्थ;
पुराण, वेद, उपनिषद, इत्यादि की भाषा संस्कृत है! संस्कृत
भाषा, देवो की भाषा मानी जाती है! भारत प्राचीन
काल मे "विश्व का सिरमौर" कहा जाता था, उसके पीछे
संस्कृत के ज्ञान का अहम योगदान था! मध्य्काल मे विदेशी
आक्रमणो के बाद यह भाषा लुप्त सी होने लगी और हमारी
सभ्यता की नींव बिखरती गयी!१९४७ मे स्वतन्त्रता के
बाद संस्कृत के महत्व को समझते हुए सरकार ने इसके
पुन: उत्थान के लिए बहुत सारी नीतियाँ बनाई है!

भारत

मेरा देश भारत एक महान देश है!जर्मनी के विद्वान
मैक्स्मुलर का कथन है.. "अगर पूरे दुनिया मे किसी एक
ऐसे देश की बात की जाए, जहाँ प्रकृति ने अपनी
खूबसूरती सबसे अच्छी तरह बिखेरा है तो निश्चय
ही वो भारत ही होगा!" भारत की भौगोलिक एंव सांस्कृतिक
विविधता मे एकता, इसकी सबसे बङी शक्ति है!आज भारत
विकासशील देशो की क्षेणी मे अग्रणी राष्ट्र मे गिना जाता है!
आज भारत अन्तरिक्ष विज्ञान , कम्पयूटर विज्ञान, चिकित्सा
जगत इत्यादि मे विकसित राष्ट्रो से आगे निकल चुका है!
भारत आज बहुत सारे अंतराष्ट्रीय संगठन का एक अहम
हिस्सा बन चुका है! मुझे अपने देश पर गर्व है!

महानगर नयी दिल्ली

भारतीय गणराज्य की राजधानी नई दिल्ली अपने आप
मे एक अनूठा शहर है! इतिहास और आधुनिकता का संगम
यहा अपने चरम पे दिखता है! एक तरफ़ बङे बङे शॉपिंग
मॉल, सिनेमा घर, आसमान को चीरती ऊँची-ऊँची इमारते
हैं तो दूसरी तरफ़ इसके सुदृढ इतिहास को दर्शाता ऐतिहासिक
धरोहरे! जैसे, कुतुब मीनार, हुमायू का मकबरा, लाल किला इत्यादि.
दिल्ली एक खूबसूरत शहर है! यहाँ पर्यटको के लिए अनेक
दर्शनीय स्थल है! जैसे लोटस टेम्पल, अक्षरधाम मन्दिर,
राष्ट्र्पति भवन, संसद भवन, इन्डिया गेट इत्यादि. दिल्ली मे
२०१० मे राष्ट्र्मंडल खेल प्रायोजित है जिसके लिए, तेजी से
विकास कार्य जारी है! कुछ दिनो बाद दिल्ली मे यातायात
के लिए चौङी सङके, फ़्लाईओवर्स, इत्यादि का प्रयोग बङे
स्तर पे होने लगेगा! दिल्ली एक हरा भरा शहर है! मुझे
भी दिल्ली बहुत पसंद है!

लक्ष्य

जिन्दगी मे लक्ष्य का बङा महत्व है! लक्ष्यविहीन
जीवन पतवारहीन नौका के समान होता है! अपने लक्ष्य
की ओर हमेशा अग्रसर होना कर्म की प्रधानता को दर्शाता है!
जहा तक मेरे लक्ष्य की बात है, मेरा लक्ष्य भारत और
जापान के बीच चली आ रहे अच्छे संबन्ध की प्रक्रिया को
सुदृढ करना है! मै जापानी-हिन्दी भाषा अनुवादक
बनकर अपने लक्ष्य को पूरा करना चाहती हूँ!
इसके अलावा मै समाज के उन पिछ्ङे लोगो के लिए कुछ करना
चाह्ती हूँ, जिन्हे शिक्षा का सैभाग्य नही प्राप्त हो पाता!
मै निशुल्क शिक्षा प्रदान करने हेतू अपने स्तर पर एक स्कूल
खोलना चाहती हूँ! अगर इस अच्छे कार्य मे अपना थोङा
सा भी योगदान दे पायी तो मुझे अपने जागरूक मनुष्य
होने का गर्व होगा! और वो लक्ष्य प्राप्ति की संतुष्टि से
बढकर होगा!

शौक और रुचियाँ

अच्छे शौक और रूचियाँ जिन्दगी मे आदत के रूप
मे तब्दील होकर जिन्दगी को एक नयी दिशा देती है!
जहा तक मेरे शौक का सवाल है मुझे किताबे पढना ,
गीत सुनना, डांस करना पसंद है, किताबो मे मुझे
साहित्य की किताबे पढना पसंद है! मेरे पसंदीदा
लेखक चेतन भगत है! मुझे ढाबे पे बैठकर दोस्तो के
साथ गपशप करना अच्छा लगता है! मुझे सिनेमा
देखना भी पसंद है! इसके अलावा समय मिलने
पर मै खरीददारी करना पसंद करती हूँ!

जापानी भाषा

भाषा विचारों को व्यक्त करने का सबसे उत्तम माध्यम है!
विचारों के परस्पर तालमेल की आवश्यकता का महत्व,
विदेशी भाषा पढने के बाद अच्छी तरह समझ में आने लगी है!
जापानी भाषा रुचिकर परंतु कठिन है! जापानी भाषा तीन
लिपियों में लिखी जाती है हीरागाना, काताकाना एवं कांजी!
हीरागाना में जापानी भाषा के मूल शब्द लिखे जाते हैं !
जापानी भाषा में समायोजित विदेषी शब्दों को लिखने हेतू
काताकाना क प्रयोग होता है ! कांजी हीरगाना के बदले
प्रयोग में लायी जाने वाली चिह्न हैं जिनकी उत्पत्ति चीन मे हुई है!
जापानी प्रौद्योगिकी को समझने हेतू जापानी भाषा का ज्ञान अत्यंत
ही महत्वपूर्ण है! मुझे जापानी भाषा पसंद है!

पार्थसारथी चट्टानें

प्रकॄति के मनोरम गोद मे स्थित यह स्थान ज.ने.वि. के
खूबसूरत स्थानों में से एक है! यहां के पठारो
की हरियाली मनमोहक है! यहा पर दिल्ली महानगर
के कोलाहल एवं भागदौङ की जिंदगी से दूर एक अनूठे
किस्म के शांति का अहसास होता है! वैसे तो ये प्रेमी
युगलों मे अधिक लोकप्रिय है परंतु अक्सर ही लोग यहां खुद
से बातचीत करने भी चले आते हैं! यहा से कुतुब मीनार
देखा जा सकता है! यहाँ से सूर्योदय का मनोरम दॄश्य,
पक्षियों के कलरव के बीच मनमोहक और आनंदमयी होता है!
अक्सर ही यहाँ छात्रगण सामूहिक नॄत्य का आयोजन करते हैं!
आत्मनिरीक्षण के लिए ज. ने. वि. में इससे उपयुक्त स्थान शायद कोई नहीं!

छात्र राजनीति और चुनाव

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय मे छात्र राजनीति का
आदर्श रूप देखने को मिलता है! यहाँ की राजनीति
विचारधारा की राजनीति है! यहाँ मतो के विभिन्नता
की लङाई पर्चे एंव पोस्टर के द्वारा लङी जाती है!
यहाँ एक वर्ष के दौरान विभिन्न स्तर पर चुनाव छात्रो के
द्वारा ही आयोजित किए जाते है! चुनाव के कुशल आयोजन हेतू
चुनाव परिषद का गठन किया जाता है! चुनाव के दौरान
जे.एन.यू का बौद्धिक एंव वैचारिक मतो का अनूठा ताल मेल
देखने को मिलता है! छात्रसंघ के चुनाव के प्रचार अभियान
के दौरान नामी गिरामी हस्तियाँ भाषण देने आते है! इस
चुनाव क मुख्य आकर्षण अध्यक्षिय वाद विवाद होता है!

छात्रावास

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय मे १४ छात्रावास हैं!
छात्रावासो के नाम भारत के विभिन्न नदियों के नाम पर
रखे गये है जैसे कावेरी, साबरमती, ब्रह्मपुत्रा इत्यादि!
यहाँ के छात्रावास जीवन कि अनूठी बात ये है कि यहाँ
के छात्रावास मे लङके और लङकियां साथ-साथ रहते है!
यहाँ हर छात्रावास में भोजनालय है, जहां छात्र भोजन
करते है! छात्रावास मे खेलकूद की व्यवस्था है! जहाँ
टेबल टेनिस, बैडमिन्टन, वाली बॉल इत्यादि खेल खेले जा सकते है!
हर छात्रावास साल मे एक बार सांस्कृतिक कार्यक्रमो का आयोजन
करता है जिसमे छात्रगण बढ-चढ कर हिस्सा लेते है!
यहाँ का छात्रावास जीवन सुखमय, शांतिपूर्ण एंव पढाई के अनुकूल है!

मेरा नगर देहरादून

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मेरा नगर देहरादून (उत्तराखन्ड प्रान्त की राजधानी) है!
देहरादून , भारत के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलो मे से एक है!
यहाँ प्रकृति ने अपने सौन्दर्य को पहाङ, नदी, झरने,
जैसे विभिन्न रूपो मे बिखेरा है! यहाँ का मौसम खुशनुमा है!
यहा बारिश सालोभर होती है! सर्दियो मे जब तापमान गिर जाता है
तो अक्सर बर्फ़ पङती है!सर्दियों मे देहरादून की खूबसूरती और
निखर कर सामने आती है! पास मे ही स्थित मसूरी सर्दियो के
मौसम मे बर्फ़ से ढकी होने के कारण बहुत मनोरम लगती है!
लोग विभिन्न प्रकार के बर्फ़ के खेल का लुत्फ़ उठाते है!
यहाँ पर स्कूली पढाई के लिए संपूर्ण भारत मे प्रसिद्ध
अनेक अच्छे स्कूल है. जैसे, दून स्कूल, वेल्हम, वुड्स्टॉक,
दून इंटरनेशनल इत्यादि. यहाँ पर विभिन्न प्रकार के
प्रशिक्षण केन्द्र अवस्थित है! जैसे, आई.एम.ए ,आई.ए.एस
प्रशिक्षण केन्द्र इत्यादि. मुझे मेरा नगर बहुत पसंद है!
इस नगर से मेरे बचपन की अनूठी व खूबसूरत यादे जुङी हैं!

जे.एन.यू

विश्व प्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरु विश्व्विघालय की स्थापना
सन्‌ १९६९ मे हुई थी! जवाहरलाल नेहरू विश्व्विघालय
भारत की सबसे अच्छे विश्विद्यालयों मे से एक है! मूलतः
यह एक शोध संस्थान है! यहाँ का परिसर हरियाली से
परिपूर्ण है! यहाँ से अरावली पर्वत श्रृंखला प्रारंभ
होती है! यहाँ १४ छात्रावास है जिसमे रहकर लगभग
५००० छात्र पढाई करते है! यहाँ लगभग ६० देशों के
छात्रगण पढाई करते है! यहाँ विभिन्न शास्त्रो की
पढाई होती है जैसे विज्ञान, भूगोल, इतिहास, संस्कृत,
राजनीति शास्त्र कम्पयूटर इत्यादि.

जापानी भाषा केन्द्र

जापानी भाषा केन्द्र की स्थापना १९७३ में हुई थी!
इसके अन्तर्गत जापानी, कोरियाई, भाषा इन्डोनेशिया
की पढाई होती हैं! हमारे केन्द्र की अध्यक्षा
श्रीमति अनिता खन्ना है! इस केन्द्र मे जापानी भाषा
की स्नातक से पी.एच.डी तक, कोरियाई भाषा की स्नातक
एंव स्नातकोत्तर की पढाई की जा सकती है! हमारे
केन्द्र द्वारा हर साल बुनकासाई, जापानी सांस्कृतिक
कार्यक्रम आयोजित की जाती है! यहाँ के शिक्षक अनुभवी
एंव विद्वान है! हमारे केन्द्र मे पढाई का वातावरण उत्तम है!

एस. एल.

एस. एल. यानी भाषा अध्य्यन संस्थान जे. एन. यू. का
एक अभिन्न अंग है, जिसके अन्तर्गत स्नातक से पी.एच.डी.
तक की पढाई होती हैं! गौर करने वाली बात ये है
की जे.एन.यू. में स्नातक की पढाई मात्र इसी संस्थान
में होती हैं! विदेशी छात्रगण भी यहाँ पर विभिन्न
विदेशी भाषाए सीखते हैं! यहाँ विदेशी भाषाओ
के साथ-साथ भारतीय भाषाओ की भी पढाई होती है!
यहाँ पढाई की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण,
देश के सुदूर प्रान्तो के ही नही बल्कि विदेशो के भी
छात्रगण आकर विदेशी भाषा की पढाई करते है!
केन्द्र मे मेधावी छात्रो को प्रोत्साहित करने हेतू विभिन्न
प्रकार की छात्र वृतियाँ प्रदान की जाती है!
मुझे अपने संस्थान पर गर्व है!

स्वयं के बारे में

मेरा नाम दीपिका भाटिया है! मेरे पिताजी सर्विसमैन है!
मेरी माताजी गृहणी है! मेरा एक छोटा भाई और एक बङी बहन है!
भाई बारहवी कक्षा मे है! मेरा जन्म मेरठ मे हुआ!
मेरे पिताजी की नौकरी की प्रकृति स्थानांतर होने के
कारण हम लोग बहुत सारी जगह रह चुके है! जैसे कि मेरठ,
हरिद्वार, देहरादून इत्यादि. मै मजबूत इरादो वाली
आत्मविश्वासी और महत्वकाँक्षी लङकी हूँ!
मेरा सबल पक्ष मेरी सकारात्मक सोच है!
मै अपने परिवार से बहुत प्रेम करती हूँ!